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यथा कर्म तथा फलम्”

Feb 13
1 min read

आदरणीय मंचासीन अतिथिगण, गुरुजन और मेरे प्रिय साथियो —

आज मैं पूरे उत्साह के साथ एक महान सत्य पर अपने विचार रखना चाहता/चाहती हूँ —

“यथा कर्म तथा फलम्।”


इसका अर्थ है — जैसा हमारा कर्म होगा, वैसा ही हमारा भविष्य होगा।

यह केवल एक सूक्ति नहीं, बल्कि जीवन का अटल नियम है।


साथियो, सपने देखने से सफलता नहीं मिलती —

सफलता मिलती है मेहनत से, लगन से और निरंतर प्रयास से।

बीज बोए बिना फसल नहीं उगती, और परिश्रम किए बिना सफलता नहीं मिलती।


इतिहास गवाह है कि जिन्होंने अपने कर्म पर विश्वास किया, वही महान बने।

संघर्ष ही सफलता की सीढ़ी है और कर्म ही उस सीढ़ी पर चढ़ने की शक्ति देता है।


आइए, हम सब आज यह संकल्प लें —

कि हम अपने हर कार्य को पूरी ईमानदारी और परिश्रम से करेंगे,

क्योंकि हमारा आज का कर्म ही हमारा कल बनाएगा।


अंत में मैं अपनी वाणी को इस पंक्ति के साथ विराम देना चाहूँगा/चाहूँगी —

“कर्म ही पूजा है, और कर्म ही सफलता की कुंजी है।”



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