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सेवानिवृत्ति समारोह भाषण




“कबीर सेवा जो करे, मन में रखे न मान,

कर्म किया चुपचाप जो, वही सच्चा ज्ञान।”


भाषण

माननीय मंचासीन अतिथिगण,

आदरणीय वरिष्ठजन,

प्रिय सहकर्मियों एवं मित्रों,


आज का यह अवसर केवल सेवा-अवधि के पूर्ण होने का नहीं,

बल्कि एक गरिमामय और प्रेरक जीवन-यात्रा के सम्मान का अवसर है,

जिसे हमारे आदरणीय श्री (नाम),

पद – (पद) | विभाग – (विभाग),

ने शांत स्वभाव, सरल आचरण और निस्वार्थ सेवा के साथ जिया है।


कबीर जी का यह दोहा उनके व्यक्तित्व का सजीव प्रतिबिंब है।

उन्होंने कभी अपने कार्य का प्रदर्शन नहीं किया,

कभी पद या अधिकार का अभिमान नहीं रखा,

बल्कि निरंतर, ईमानदार और निःशब्द कर्म से

अपने कर्तव्य का निर्वहन किया।


उन्होंने हर परिस्थिति में

अपना आचरण शांत और संयमित रखा,

हर सहकर्मी को सम्मान दिया,

और प्रत्येक जिम्मेदारी को

अपने कर्तव्य का स्वाभाविक हिस्सा माना।


आज जब वे औपचारिक रूप से सेवा से निवृत्त हो रहे हैं,

तो अपने आचरण और कर्मों के माध्यम से

वे हमें कर्तव्य, विनम्रता और सेवा का सच्चा अर्थ

समझाकर जा रहे हैं।


प्रिय श्री (नाम),

आपकी सादगी,

आपका संतुलित व्यवहार

और आपकी निःस्वार्थ सेवा

हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी।


ईश्वर से कामना है कि

आपका आगामी जीवन

स्वास्थ्य, शांति और संतोष से परिपूर्ण हो,

और आपकी जीवन-यात्रा

आने वाली पीढ़ियों को

सेवा और सदाचार का मार्ग दिखाती रहे।


इन्हीं शब्दों के साथ,

हम आपको हृदय से धन्यवाद देते हैं

और आपके उज्ज्वल भविष्य की

हार्दिक शुभकामनाएँ प्रदान करते हैं।


धन्यवाद। 🙏


 
 
 

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