top of page


सेवानिवृत्ति समारोह भाषण
“कबीर सेवा जो करे, मन में रखे न मान, कर्म किया चुपचाप जो, वही सच्चा ज्ञान।” भाषण माननीय मंचासीन अतिथिगण, आदरणीय वरिष्ठजन, प्रिय सहकर्मियों एवं मित्रों, आज का यह अवसर केवल सेवा-अवधि के पूर्ण होने का नहीं, बल्कि एक गरिमामय और प्रेरक जीवन-यात्रा के सम्मान का अवसर है, जिसे हमारे आदरणीय श्री (नाम), पद – (पद) | विभाग – (विभाग), ने शांत स्वभाव, सरल आचरण और निस्वार्थ सेवा के साथ जिया है। कबीर जी का यह दोहा उनके व्यक्तित्व का सजीव प्रतिबिंब है। उन्होंने कभी अपने कार्य का प्रदर्शन नहीं
Jan 291 min read
bottom of page