वसंत पंचमी – ज्ञान, कर्म और नवचेतना का संगम
- cs gujral
- 7 days ago
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Updated: 6 days ago
।ॐ। सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम् ।
हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में ।ॐ ।
मैं वीणा और किताब को धारण करने वाली हंस पर सवार देवी सरस्वती को देख रहा हूँ वो मुझे विद्या ज्ञान का दान करें
विषय: वसंत पंचमी – ज्ञान, कर्म और नवचेतना का संगम
आदरणीय प्राचार्या महोदया,
सम्मानित शिक्षकगण,
मेरे सहकर्मी एवं प्रिय छात्राओं
आप सभी को वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
वसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का एक पावन पर्व है, जो ज्ञान, कला, संगीत और विवेक की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती को समर्पित है। यह दिन केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक अवसर नहीं, बल्कि हमें यह स्मरण कराता है कि ज्ञान ही मानव जीवन की वास्तविक शक्ति है।
शीत ऋतु की निष्क्रियता के बाद वसंत ऋतु प्रकृति में नवजीवन, रंग और ऊर्जा भर देती है। ठीक उसी प्रकार, ज्ञान हमारे विचारों को जागृत करता है, हमारी सोच को सकारात्मक बनाता है और हमें सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
आज इस अवसर पर यहाँ विद्यार्थी और कर्मचारी—दोनों उपस्थित हैं। विद्यार्थी ज्ञान अर्जन की प्रक्रिया में होते हैं, वे भविष्य के निर्माता हैं। वहीं कर्मचारी अपने अनुभव, अनुशासन और कर्म से उस ज्ञान को व्यवहार में उतारते हैं। इस प्रकार, हम सभी आजीवन सीखने की एक निरंतर यात्रा का हिस्सा हैं।
माँ सरस्वती हमें केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं देतीं, बल्कि विनम्रता, संयम, नैतिकता और विवेक का भी पाठ पढ़ाती हैं। वर्तमान समय में जब तकनीक तेज़ी से आगे बढ़ रही है, तब ज्ञान के साथ-साथ मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को बनाए रखना और भी आवश्यक हो गया है।
वसंत पंचमी हमें यह संदेश देती है कि हम अपने ज्ञान और कर्म का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि संस्था, समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए करें। एक सकारात्मक और मूल्य-आधारित वातावरण ही किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान बनता है।
आइए, इस वसंत पंचमी पर हम सभी यह संकल्प लें कि हम निरंतर सीखते रहेंगे, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करेंगे और अपने आचरण से एक संस्कारयुक्त, सृजनात्मक और प्रेरणादायक वातावरण का निर्माण करेंगे।
इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
धन्यवाद।
जय माँ सरस्वती। 🌼📚



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