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सही समझ और सही कर्म—एक उज्ज्वल भविष्य का आधार

  • 1 day ago
  • 3 min read

आदरणीय मुख्य अतिथि, विद्वान शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियों,

आज मैं एक ऐसे शाश्वत मंत्र पर अपने विचार साझा करने जा रहा हूँ, जो प्राचीन काल में जितना सत्य था, आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल युग में उससे कहीं अधिक अनिवार्य हो गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है:

"यद्भावं तद्भवति"

(अर्थात: जैसा हमारा भाव या समझ होती है, वैसा ही हमारा अस्तित्व और हमारे कर्म बन जाते हैं।)

भगवान बुद्ध ने सदियों पहले सिखाया था कि संसार की सभी समस्याओं की जड़ 'अज्ञानता' है। उनके अष्टांगिक मार्ग में 'सम्मा दिट्ठी' (Right Understanding) को सबसे पहला स्थान दिया गया है। इसका सरल अर्थ है कि यदि आपकी नींव या सोच सही नहीं है, तो उस पर खड़ी सफलता की इमारत कभी सुरक्षित नहीं रह सकती।

मोदी जी के 3 नियम और तकनीकी नैतिकता

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में इसी बुद्ध दर्शन को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई (AI) जैसी शक्तिशाली तकनीक का भविष्य केवल एल्गोरिदम पर नहीं, बल्कि 'सही समझ' पर टिका होना चाहिए। उन्होंने इस 'सही समझ' को लागू करने के लिए तीन बुनियादी नियम हमारे सामने रखे हैं:

पारदर्शिता और 'ग्लास बॉक्स' दृष्टिकोण (Transparency):

मोदी जी का पहला नियम कहता है कि कोई भी सिस्टम या निर्णय 'ब्लैक बॉक्स' की तरह गुप्त नहीं होना चाहिए। इसे 'ग्लास बॉक्स' की तरह पारदर्शी होना चाहिए ताकि समाज यह देख सके कि तकनीक कैसे काम कर रही है। पारदर्शिता ही भरोसे का आधार है।

डेटा संप्रभुता और सुरक्षा (Data Sovereignty and Security):

दूसरा नियम यह सुनिश्चित करता है कि डेटा का उपयोग निष्पक्ष हो। सही समझ का अर्थ है यह पहचानना कि डेटा केवल जानकारी नहीं, बल्कि नागरिकों की निजता है। इसे किसी भी प्रकार के पक्षपात (Bias) से मुक्त होना चाहिए ताकि लाभ बिना किसी भेदभाव के सबको मिले।

मानव-केंद्रित दृष्टिकोण (Human-Centric Approach):

तीसरा नियम यह है कि तकनीक को कभी भी मानवीय मूल्यों से ऊपर नहीं होना चाहिए। एआई का लक्ष्य मनुष्य को हटाना नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं को बढ़ाकर समावेशी विकास (Inclusion) सुनिश्चित करना होना चाहिए।

जीवन के विभिन्न आयामों में अनुप्रयोग

साथियों, यह सिद्धांत केवल तकनीक तक सीमित नहीं है।

एक छात्र के रूप में, यदि आपकी समझ केवल 'अंक' पाने तक सीमित है, तो आपका कर्म केवल 'रटना' होगा। लेकिन यदि आपकी समझ 'ज्ञान' की है, तो आपका कर्म 'नवाचार' (Innovation) बन जाएगा।


एक प्रोफेशनल के तौर पर, यह समझ हमें सिखाती है कि सफलता केवल लाभ से नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी जवाबदेही से मापी जाती है। जब एक इंजीनियर, डॉक्टर या नेता 'सही समझ' के साथ काम करता है, तो उसका हर कदम 'सही कर्म' बन जाता है, जो राष्ट्र निर्माण में सहायक होता है।

निष्कर्ष

निष्कर्षतः, "सही समझ" वह बीज है जिससे "सही कर्म" का वृक्ष उगता है और "लोक-कल्याण" के फल लगते हैं। आज के दौर में, जहाँ सूचनाओं का अंबार है, हमें सूचनाओं के ढेर से ऊपर उठकर 'विवेक' को जाग्रत करना होगा। हमें तकनीक और ज्ञान का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि करुणा और सेवा के लिए करना होगा।


अपनी बात को विराम देते हुए, मैं बस इन पंक्तियों के माध्यम से 'सही समझ' के महत्व को दोहराना चाहूँगा:

दृष्टि बदलो तो नज़ारे बदल जाते हैं,

सोच बदलो तो सितारे बदल जाते हैं,

कश्तियाँ बदलने की ज़रूरत नहीं ऐ दोस्त,

दिशा को बदलो तो किनारे बदल जाते हैं।

आइए संकल्प लें कि हम अपने भीतर वह 'प्रकाश' जाग्रत करेंगे जो हमें सही कर्म की ओर ले जाए।

धन्यवाद! जय हिन्द!






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