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न हि सर्वः सर्वं जानाति
माननीय अध्यक्ष महोदय, मंचासीन आदरणीय महानुभाव, और मेरी जोशीली संस्था के उर्जावान साथियों, आज मैं आप सबके बीच एक ऐसी चिंगारी लेकर आया हूँ, जो अगर दिल में उतर जाए तो हमारी संस्था की पूरी दिशा बदल सकती है। वह है यह प्रखर उक्ति – **“न हि सर्वः सर्वं जानाति।”** अर्थ – *कोई भी सब कुछ नहीं जानता, पर हर किसी के पास कुछ न कुछ अनमोल ज़रूर है।* साथियो, जिस दिन कोई व्यक्ति, कोई विभाग, कोई नेता यह सोच ले कि “अब तो मुझे सब पता है”, उसी दिन से उसका पतन शुरू हो जाता है। ठहरा हुआ पानी सड
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